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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3783

नंबर 3783किताब 49, नंबर 182
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ، قَالَ سَمِعْتُ الْبَرَاءَ بْنَ عَازِبٍ، يَقُولُ رَأَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَاضِعًا الْحَسَنَ بْنَ عَلِيٍّ عَلَى عَاتِقِهِ وَهُوَ يَقُولُ ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنِّي أُحِبُّهُ فَأَحِبَّهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ الْفُضَيْلِ بْنِ مَرْزُوقٍ ‏.‏
Narrated Al-Bara bin 'Azib:"I saw the Prophet (ﷺ) placing Al-Hasan bin 'Ali upon his shoulder while saying: 'O Allah, I love him, so love him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।