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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3777

नंबर 3777किताब 49, नंबर 176
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ، عَنْ أَبِي جُحَيْفَةَ، قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَكَانَ الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ يُشْبِهُهُ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ وَابْنِ عَبَّاسٍ وَابْنِ الزُّبَيْرِ ‏.‏
Narrated Abu Juhaifah:"I saw the Messenger of Allah (ﷺ), and Al-Hasan bin 'Ali used to resemble him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।