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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3744

नंबर 3744किताब 49, नंबर 141
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمْرٍو، قَالَ حَدَّثَنَا زَائِدَةُ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنْ زِرٍّ، عَنْ عَلِيِّ رضى الله عنه قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ لِكُلِّ نَبِيٍّ حَوَارِيًّا وَإِنَّ حَوَارِيَّ الزُّبَيْرُ بْنُ الْعَوَّامِ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَيُقَالُ الْحَوَارِيُّ هُوَ النَّاصِرُ ‏.‏ سَمِعْتُ ابْنَ أَبِي عُمَرَ يَقُولُ قَالَ سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ الْحَوَارِيُّ هُوَ النَّاصِرُ ‏.‏
Narrated 'Ali bin Abi Talib [may Allah be pleased with him]:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "Indeed, every Prophet has a Hawari, and my Hawari is Az-Zubair bin Al-'Awwam
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।