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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3729

नंबर 3729किताब 49, नंबर 126
حَدَّثَنَا خَلَّادُ بْنُ أَسْلَمَ الْبَغْدَادِيُّ، حَدَّثَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ، أَخْبَرَنَا عَوْفٌ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ هِنْدٍ الْجَمَلِيِّ قَالَ: قَالَ عَلِيٌّ: كُنْتُ إِذَا سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَعْطَانِي وَإِذَا سَكَتُّ ابْتَدَأَنِي. قَالَ أَبُو عِيسَى: هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ
Narrated Ali:"When I would ask the Messenger of Allah SAW he would give me, and when I would be silent, he would initiate (speech or giving) with me
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।