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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3721

नंबर 3721किताब 49, नंबर 118
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ وَكِيعٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، عَنْ عِيسَى بْنِ عُمَرَ، عَنِ السُّدِّيِّ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كَانَ عِنْدَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم طَيْرٌ فَقَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ ائْتِنِي بِأَحَبِّ خَلْقِكَ إِلَيْكَ يَأْكُلُ مَعِي هَذَا الطَّيْرَ ‏"‏ ‏.‏ فَجَاءَ عَلِيٌّ فَأَكَلَ مَعَهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ السُّدِّيِّ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ وَقَدْ رُوِيَ هَذَا الْحَدِيثُ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنْ أَنَسٍ ‏.‏ وَعِيسَى بْنُ عُمَرَ هُوَ كُوفِيٌّ وَالسُّدِّيُّ اسْمُهُ إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَدْ أَدْرَكَ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ وَرَأَى الْحُسَيْنَ بْنَ عَلِيٍّ وَثَّقَهُ شُعْبَةُ وَسُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَزَائِدَةُ وَوَثَّقَهُ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:"There was a bird with the Prophet (ﷺ), so he said: 'O Allah, send to me the most beloved of Your creatures to eat this bird with me.' So 'Ali came and ate with him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।