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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3681

नंबर 3681किताब 49, नंबर 77
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ الْعَقَدِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا خَارِجَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الأَنْصَارِيُّ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ أَعِزَّ الإِسْلاَمَ بِأَحَبِّ هَذَيْنِ الرَّجُلَيْنِ إِلَيْكَ بِأَبِي جَهْلٍ أَوْ بِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَكَانَ أَحَبَّهُمَا إِلَيْهِ عُمَرُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ مِنْ حَدِيثِ ابْنِ عُمَرَ ‏.‏
Narrated Ibn 'Umar:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "O Allah! Honor Islam through the most dear of these two men to you: Through Abu Jahl or through 'Umar bin Al-Khattab." He said: "And the most dear of them to Him was 'Umar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।