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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3663

नंबर 3663किताब 49, नंबर 59
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الأُمَوِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سَالِمٍ أَبِي الْعَلاَءِ الْمُرَادِيِّ، عَنْ عَمْرِو بْنِ هَرِمٍ، عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ، عَنْ حُذَيْفَةَ، رضى الله عنه قَالَ كُنَّا جُلُوسًا عِنْدَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ إِنِّي لاَ أَدْرِي مَا بَقَائِي فِيكُمْ فَاقْتَدُوا بِاللَّذَيْنِ مِنْ بَعْدِي ‏"‏ ‏.‏ وَأَشَارَ إِلَى أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ ‏.‏
Narrated Hudhaifah [may Allah be pleased with him]:"We were sitting with the Prophet (ﷺ) and he said: 'I do not know how long I will be with you, so stick to the two after me,' and he signaled towards Abu Bakr and 'Umar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।