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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3642

नंबर 3642किताब 49, नंबर 38
وَقَدْ رُوِيَ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ جَزْءٍ، مِثْلُ هَذَا ‏.‏ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ، أَحْمَدُ بْنُ خَالِدٍ الْخَلاَّلُ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ إِسْحَاقَ السَّيْلَحَانِيُّ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَارِثِ بْنِ جَزْءٍ، قَالَ مَا كَانَ ضَحِكُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِلاَّ تَبَسُّمًا ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ لَيْثِ بْنِ سَعْدٍ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Narrated Ibn Jaz:"The laughter of the Messenger of Allah (ﷺ) was not but smiling
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।