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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3640

नंबर 3640किताब 49, नंबर 36
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا أَبُو قُتَيْبَةَ، سَلْمُ بْنُ قُتَيْبَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُثَنَّى، عَنْ ثُمَامَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُعِيدُ الْكَلِمَةَ ثَلاَثًا لِتُعْقَلَ عَنْهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ إِنَّمَا نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُثَنَّى ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:that the Messenger of Allah (ﷺ) would repeat a statement three times so that it could be understood
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।