सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3626

नंबर 3626किताब 49, नंबर 22
حَدَّثَنَا عَبَّادُ بْنُ يَعْقُوبَ الْكُوفِيُّ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ أَبِي ثَوْرٍ، عَنِ السُّدِّيِّ، عَنْ عَبَّادِ بْنِ أَبِي يَزِيدَ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ، قَالَ كُنْتُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمَكَّةَ فَخَرَجْنَا فِي بَعْضِ نَوَاحِيهَا فَمَا اسْتَقْبَلَهُ جَبَلٌ وَلاَ شَجَرٌ إِلاَّ وَهُوَ يَقُولُ السَّلاَمُ عَلَيْكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَرَوَى غَيْرُ وَاحِدٍ عَنِ الْوَلِيدِ بْنِ أَبِي ثَوْرٍ وَقَالُوا عَنْ عَبَّادٍ أَبِي يَزِيدَ مِنْهُمْ فَرْوَةُ بْنُ أَبِي الْمَغْرَاءِ ‏.‏
Narrated 'Ali bin Abi Talib:"I was with the Prophet (ﷺ) in Makkah. We departed to one of its suburbs, and no mountain or tree was before him, except that it said: 'Peace be upon you O Messenger of Allah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।