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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3624

नंबर 3624किताब 49, नंबर 20
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، وَمَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، قَالاَ أَنْبَأَنَا أَبُو دَاوُدَ الطَّيَالِسِيُّ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ مُعَاذٍ الضَّبِّيُّ، عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ بِمَكَّةَ حَجَرًا كَانَ يُسَلِّمُ عَلَىَّ لَيَالِيَ بُعِثْتُ إِنِّي لأَعْرِفُهُ الآنَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated Simak bin Harb:from Jabir bin Samurah, that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "Indeed in Makkah there is a rock that used to give me Salam during the night of my advent, and I know it even now
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।