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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3618

नंबर 3618किताब 49, नंबर 14
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ هِلاَلٍ الصَّوَّافُ الْبَصْرِيُّ، حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ الضُّبَعِيُّ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ لَمَّا كَانَ الْيَوْمُ الَّذِي دَخَلَ فِيهِ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْمَدِينَةَ أَضَاءَ مِنْهَا كُلُّ شَيْءٍ فَلَمَّا كَانَ الْيَوْمُ الَّذِي مَاتَ فِيهِ أَظْلَمَ مِنْهَا كُلُّ شَيْءٍ وَمَا نَفَضْنَا عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الأَيْدِي وَإِنَّا لَفِي دَفْنِهِ حَتَّى أَنْكَرْنَا قُلُوبَنَا ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ صَحِيحٌ ‏.‏
अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अंहु- कहते हैं कि जिस दिन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मदीने में क़दम रखा, तो उसकी हर चीज़ चमक उठी और जिस दिन आपकी मृत्यु हुई, उसकी हर चीज़ पर अंधेरा छा गया। जब हमने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को दफ़न करके हाथ झाड़ा, तो हम ख़ुद अपने दिलों को भी पहचान नहीं पा रहे थे।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।