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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3604.08

नंबर 3604.08किताब 48, नंबर 242
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى، أَخْبَرَنَا جَابِرُ بْنُ نُوحٍ، قَالَ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَدْعُو فَيَقُولُ ‏ "‏ اللَّهُمَّ مَتِّعْنِي بِسَمْعِي وَبَصَرِي وَاجْعَلْهُمَا الْوَارِثَ مِنِّي وَانْصُرْنِي عَلَى مَنْ يَظْلِمُنِي وَخُذْ مِنْهُ بِثَأْرِي ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that the Messenger of Allah (ﷺ) used to supplicate, saying:“O Allah, give me pleasure in my hearing and my sight, and make it the inheritor from me, and aid me against whoever oppresses me, and take vengeance from him for me (Allāhumma matti`nī bisam`ī wa baṣarī waj`alhumal-wāritha minnī, wanṣurnī `alā man yaẓlimunī, wa khudh minhu bitha’rī)”

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।