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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3604.06

नंबर 3604.06किताब 48, नंबर 240
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى، أَخْبَرَنَا أَبُو دَاوُدَ، أَخْبَرَنَا صَدَقَةُ بْنُ مُوسَى، أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ وَاسِعٍ، عَنْ سُمَيْرِ بْنِ نَهَارٍ الْعَبْدِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ حُسْنَ الظَّنِّ بِاللَّهِ مِنْ حُسْنِ عِبَادَةِ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Indeed, having good thoughts concerning Allah is from the perfection of the worship of Allah.”

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।