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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3595

नंबर 3595किताब 48, नंबर 226
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، وَعَبْدُ الرَّزَّاقِ، وَأَبُو أَحْمَدَ وَأَبُو نُعَيْمٍ عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ زَيْدٍ الْعَمِّيِّ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ قُرَّةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الدُّعَاءُ لاَ يُرَدُّ بَيْنَ الأَذَانِ وَالإِقَامَةِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَهَكَذَا رَوَى أَبُو إِسْحَاقَ الْهَمْدَانِيُّ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ بُرَيْدِ بْنِ أَبِي مَرْيَمَ الْكُوفِيِّ عَنْ أَنَسٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَ هَذَا وَهَذَا أَصَحُّ ‏.‏
Anas [bin Malik] narrated that the Prophet (ﷺ) said:“The supplication is not rejected between the Adhan and the Iqamah.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।