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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3584

नंबर 3584किताब 48, नंबर 215
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، أَخْبَرَنِي أَبِي، عَنِ الْمُثَنَّى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا غَزَا قَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ أَنْتَ عَضُدِي وَأَنْتَ نَصِيرِي وَبِكَ أُقَاتِلُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ وَمَعْنَى قَوْلِهِ عَضُدِي ‏.‏ يَعْنِي عَوْنِي ‏.‏
Anas narrated that when the Prophet (ﷺ) would go out for an expedition, he would say:“O Allah, You are my `Aḍud and You are my Helper, and by You do I fight (Allāhumma anta `aḍudī, wa anta naṣīrī, wa bika uqātil).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।