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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3562

नंबर 3562किताब 48, नंबर 193
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ وَكِيعٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ سَالِمٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنْ عُمَرَ، أَنَّهُ اسْتَأْذَنَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فِي الْعُمْرَةِ فَقَالَ ‏ "‏ أَىْ أُخَىَّ أَشْرِكْنَا فِي دُعَائِكَ وَلاَ تَنْسَنَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Ibn `Umar narrated from `Umar:that he sought permission from the Prophet (ﷺ) concerning `Umrah, so he said: “O my little brother, include us in your supplication and do not forget us.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।