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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3559

नंबर 3559किताब 48, नंबर 190
حَدَّثَنَا حُسَيْنُ بْنُ يَزِيدَ الْكُوفِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو يَحْيَى الْحِمَّانِيُّ، حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ وَاقِدٍ، عَنْ أَبِي نُصَيْرَةَ، عَنْ مَوْلًى، لأَبِي بَكْرٍ عَنْ أَبِي بَكْرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا أَصَرَّ مَنِ اسْتَغْفَرَ وَلَوْ فَعَلَهُ فِي الْيَوْمِ سَبْعِينَ مَرَّةً ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ إِنَّمَا نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ أَبِي نُصَيْرَةَ وَلَيْسَ إِسْنَادُهُ بِالْقَوِيِّ ‏.‏
Abu Bakr narrated:That the Messenger of Allah (ﷺ) said: “He who seeks forgiveness has not been persistent in sin, even if he does it seventy times in a day.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।