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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3552

नंबर 3552किताब 48, नंबर 183
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ أَبِي حَمْزَةَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ دَعَا عَلَى مَنْ ظَلَمَهُ فَقَدِ انْتَصَرَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ أَبِي حَمْزَةَ ‏.‏ وَقَدْ تَكَلَّمَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ فِي أَبِي حَمْزَةَ مِنْ قِبَلِ حِفْظِهِ وَهُوَ مَيْمُونٌ الأَعْوَرُ ‏.‏ حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الرُّؤَاسِيُّ، عَنْ أَبِي الأَحْوَصِ، عَنْ أَبِي حَمْزَةَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ نَحْوَهُ ‏.‏
Aishah narrated, saying:The Messenger of Allah (ﷺ) said: “Whoever supplicates against the one who wronged him has triumphed.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।