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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3525

नंबर 3525किताब 48, नंबर 156
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا الْمُؤَمِّلُ، عَنْ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَلِظُّوا بِيَا ذَا الْجَلاَلِ وَالإِكْرَامِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ وَلَيْسَ بِمَحْفُوظٍ ‏.‏ وَإِنَّمَا يُرْوَى هَذَا عَنْ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ عَنْ حُمَيْدٍ عَنِ الْحَسَنِ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَهَذَا أَصَحُّ وَمُؤَمِّلٌ غَلِطَ فِيهِ فَقَالَ عَنْ حَمَّادٍ عَنْ حُمَيْدٍ عَنْ أَنَسٍ وَلاَ يُتَابَعُ فِيهِ ‏.‏
Anas narrated that the Prophet (ﷺ) said:“Be constant with: ‘O Possessor of Majesty and Honor (Yā Dhal-Jalāli wal-Ikrām).’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।