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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3508

नंबर 3508किताब 48, नंबर 139
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ لِلَّهِ تِسْعَةً وَتِسْعِينَ اسْمًا مَنْ أَحْصَاهَا دَخَلَ الْجَنَّةَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَلَيْسَ فِي هَذَا الْحَدِيثِ ذِكْرُ الأَسْمَاءِ ‏.‏ قَالَ وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ رَوَاهُ أَبُو الْيَمَانِ عَنْ شُعَيْبِ بْنِ أَبِي حَمْزَةَ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ وَلَمْ يَذْكُرْ فِيهِ الأَسْمَاءَ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that the Prophet said:“Indeed, Allah has ninety-nine Names, whoever counts them shall enter Paradise.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।