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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3499

नंबर 3499किताब 48, नंबर 130
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى الثَّقَفِيُّ الْمَرْوَزِيُّ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ سَابِطٍ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ، قَالَ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَىُّ الدُّعَاءِ أَسْمَعُ قَالَ ‏"‏ جَوْفُ اللَّيْلِ الآخِرُ وَدُبُرَ الصَّلَوَاتِ الْمَكْتُوبَاتِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ أَبِي ذَرٍّ وَابْنِ عُمَرَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏"‏ جَوْفُ اللَّيْلِ الآخِرُ الدُّعَاءُ فِيهِ أَفْضَلُ أَوْ أَرْجَى ‏"‏ ‏.‏ أَوْ نَحْوَ هَذَا ‏.‏
Abu Umamah narrated:“It was said: ‘O Messenger of Allah, which supplication is most likely to be listened to?’ He said: ‘(During) the last part of the night, and at the end of the obligatory prayers.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।