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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3496

नंबर 3496किताब 48, नंबर 127
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ إِسْحَاقَ، حَدَّثَنَا عَبْدَةُ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ عَبَّادِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ عِنْدَ وَفَاتِهِ ‏ "‏ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي وَارْحَمْنِي وَأَلْحِقْنِي بِالرَّفِيقِ الأَعْلَى ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Aishah said:“I heard the Messenger of Allah (ﷺ) saying at his death: ‘O Allah, forgive me and have mercy on me, and join me with the Highest Company (Allāhummaghfirlī warḥamnī wa alḥiqnī bir-rafīqil a`lā).’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।