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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3488

नंबर 3488किताब 48, नंबर 119
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْبَزَّازُ، حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ عُبَادَةَ، عَنْ هِشَامِ بْنِ حَسَّانَ، عَنِ الْحَسَنِ، فِي قَوْلِهِ ‏:‏ ‏(‏ ربَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الآخِرَةِ حَسَنَةً ‏)‏ قَالَ فِي الدُّنْيَا الْعِلْمَ وَالْعِبَادَةَ وَفِي الآخِرَةِ الْجَنَّةَ ‏.‏
Hisham bin Hassan narrated from Al-Hasan :concerning the saying of Allah: O our Lord, give us good in this world, and good in the Hereafter. He said: “Knowledge and worship in this world, and Paradise in the Hereafter.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।