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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3425

नंबर 3425किताब 48, नंबर 56
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ الْحَذَّاءُ، عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ فِي سُجُودِ الْقُرْآنِ بِاللَّيْلِ ‏ "‏ سَجَدَ وَجْهِي لِلَّذِي خَلَقَهُ وَشَقَّ سَمْعَهُ وَبَصَرَهُ بِحَوْلِهِ وَقُوَّتِهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Aishah narrated:“When the Messenger of Allah would prostrate (for recitation of) the Qur’an, he would say: ‘I have prostrated my face to the One Who created it, and made its hearing and vision, through His ability and power (Sajada wajhī lilladhī khalaqahū wa shaqqa sam`ahū wa baṣarahū bi ḥawlihī wa quwwatih).’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।