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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3406

नंबर 3406किताब 48, नंबर 37
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، أَخْبَرَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ، عَنْ بَحِيرِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بِلاَلٍ، عَنِ الْعِرْبَاضِ بْنِ سَارِيَةَ، رضى الله عَنْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ لاَ يَنَامُ حَتَّى يَقْرَأَ الْمُسَبِّحَاتِ وَيَقُولُ ‏ "‏ فِيهَا آيَةٌ خَيْرٌ مِنْ أَلْفِ آيَةٍ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Ar-Irbad bin Sariyah (ra) narrated that:The Prophet (ﷺ) would not sleep until he had recited Al-Musabbihat, and he would say: “In them is an Ayah that is better than a thousand Ayah.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।