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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3398

नंबर 3398किताब 48, नंबर 29
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ، عَنْ حُذَيْفَةَ بْنِ الْيَمَانِ، رضى الله عنهما أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا أَرَادَ أَنْ يَنَامَ وَضَعَ يَدَهُ تَحْتَ رَأْسِهِ ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ قِنِي عَذَابَكَ يَوْمَ تَجْمَعُ عِبَادَكَ أَوْ تَبْعَثُ عِبَادَكَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Hudhaifah bin Al-Yaman (ra) narrated that:When the Prophet (ﷺ) would sleep, he would put his hand under his head then say: “O Allah, safeguard me from Your Punishment the Day You gather [Your slaves] (Allāhumma qinī `adhābaka yawma tajma`u [`ibādak])” or “you resurrect your slaves (tab`athu `ibādak).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।