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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3371

नंबर 3371किताब 48, नंबर 2
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، أَخْبَرَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنِ ابْنِ لَهِيعَةَ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي جَعْفَرٍ، عَنْ أَبَانَ بْنِ صَالِحٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الدُّعَاءُ مُخُّ الْعِبَادَةِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ ابْنِ لَهِيعَةَ ‏.‏
Anas bin Malik narrated that :the Prophet said: “The supplication is the essence of worship.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।