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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3366

नंबर 3366किताब 47, नंबर 418
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ عَمْرٍو الْعَقَدِيُّ، عَنِ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ، عَنِ الْحَارِثِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم نَظَرَ إِلَى الْقَمَرِ فَقَالَ ‏ "‏ يَا عَائِشَةُ اسْتَعِيذِي بِاللَّهِ مِنْ شَرِّ هَذَا فَإِنَّ هَذَا الْغَاسِقُ إِذَا وَقَبَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Aishah narrated:“The Prophet looked at the moon and he said: ‘O Aishah! Do you seek refuge with Allah from the evil of this? For indeed this is Al-Ghasiqu Idha Waqab (The darkened one as it darkens).’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Chapters on Tafsir

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।