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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3342

नंबर 3342किताब 47, नंबर 394
حَدَّثَنَا أَبُو حَفْصٍ، عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، وَأَبُو دَاوُدَ قَالاَ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ عِصَامٍ، عَنْ رَجُلٍ، مِنْ أَهْلِ الْبَصْرَةِ عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم سُئِلَ عَنِ الشَّفْعِ وَالْوَتْرِ فَقَالَ ‏ "‏ هِيَ الصَّلاَةُ بَعْضُهَا شَفْعٌ وَبَعْضُهَا وَتْرٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ قَتَادَةَ ‏.‏ وَقَدْ رَوَاهُ خَالِدُ بْنُ قَيْسٍ الْحُدَّانِيُّ عَنْ قَتَادَةَ أَيْضًا ‏.‏
Imran bin Husain narrated that:The Prophet was asked about Ash-Shafi, so he said: “It is As-Salat, some of it is Shaf (even) and some of it is Witr (odd).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Chapters on Tafsir

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।