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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3265

नंबर 3265किताब 47, नंबर 317
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ قَزْعَةَ الْبَصْرِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ حَبِيبٍ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ ثُوَيْرٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ الطُّفَيْلِ بْنِ أُبَىِّ بْنِ كَعْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلمَ ‏:‏ ‏(‏ وألْزَمَهُمْ كَلِمَةَ التَّقْوَى ‏)‏ قَالَ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ مَرْفُوعًا إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ الْحَسَنِ بْنِ قَزْعَةَ قَالَ وَسَأَلْتُ أَبَا زُرْعَةَ عَنْ هَذَا الْحَدِيثِ فَلَمْ يَعْرِفْهُ مَرْفُوعًا إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Narrated At-Tufail bin Ubayy bin Ka'b:from his father, from the Prophet (ﷺ) (regarding this Ayah): 'And made them stick to the word of Taqwa (48:26).' He (ﷺ) said (the word is): "La Ilaha Illallah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Chapters on Tafsir

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।