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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3229

नंबर 3229किताब 47, नंबर 281
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، أَخْبَرَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنْ زُهَيْرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ رَجُلٍ، عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ، عَنْ أُبَىِّ بْنِ كَعْبٍ، قَالَ سَأَلْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ قَوْلِ اللَّهِ تَعَالَى ‏:‏ ‏(‏ وأَرْسَلْنَاهُ إِلَى مِائَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ ‏)‏ قَالَ ‏"‏ عِشْرُونَ أَلْفًا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated Ubayy bin Ka'b:"I asked the Messenger of Allah (ﷺ) about the saying of Allah, Most High: 'And We sent him to a hundred thousand, or even more (37:147). He said: 'Twenty thousand (more)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Chapters on Tafsir

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।