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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3132

नंबर 3132किताब 47, नंबर 184
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدَّوْرَقِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو تُمَيْلَةَ، عَنِ الزُّبَيْرِ بْنِ جُنَادَةَ، عَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَمَّا انْتَهَيْنَا إِلَى بَيْتِ الْمَقْدِسِ قَالَ جِبْرِيلُ بِإِصْبَعِهِ فَخَرَقَ بِهِ الْحَجَرَ وَشَدَّ بِهِ الْبُرَاقَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated Ibn Buraidah:from his father that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "When we reached Bait Al-Maqdis, Jibra'il pointed with his finger causing a crack in the rock, and he tied Al-Buraq to it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Chapters on Tafsir

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।