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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3063

नंबर 3063किताब 47, नंबर 115
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنْ حُيَىٍّ، عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحُبُلِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، قَالَ آخِرُ سُورَةٍ أُنْزِلَتْ سُورَةُ الْمَائِدَةِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَرُوِيَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّهُ قَالَ آخِرُ سُورَةٍ أُنْزِلَتْ ‏:‏ ‏(‏إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ ‏)‏ ‏.‏
Narrated 'Abdullah bin 'Amr:"The last Surah revealed was Surat Al-Ma'idah and Al-Fath
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Chapters on Tafsir

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।