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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3018

नंबर 3018किताब 47, नंबर 70
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى الصَّنْعَانِيُّ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ، عَنْ شُعْبَةَ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي بَكْرِ بْنِ أَنَسٍ، عَنْ أَنَسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي الْكَبَائِرِ قَالَ ‏ "‏ الشِّرْكُ بِاللَّهِ وَعُقُوقُ الْوَالِدَيْنِ وَقَتْلُ النَّفْسِ وَقَوْلُ الزُّورِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَرَوَاهُ رَوْحُ بْنُ عُبَادَةَ عَنْ شُعْبَةَ وَقَالَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ وَلاَ يَصِحُّ ‏.‏
Narrated 'Ubaidullah bin Abi Bakr [bin Anas]:from Anas bin Malik, that the Prophet (ﷺ) [said] about the major sins: "Shirk with Allah, disobeying the parents, taking the life, and false statement
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Chapters on Tafsir

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।