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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2964

नंबर 2964किताब 47, नंबर 16
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، وَأَبُو عَمَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ إِسْرَائِيلَ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ لَمَّا وُجِّهَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِلَى الْكَعْبَةِ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ بِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ مَاتُوا وَهُمْ يُصَلُّونَ إِلَى بَيْتِ الْمَقْدِسِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ‏:‏ ‏(‏وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيُضِيعَ إِيمَانَكُمْ ‏)‏ الآيَةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Ibn 'Abbas:"When the Prophet (ﷺ) began facing the Ka'bah they said: 'O Messenger of Allah! How about our brothers who died while they were praying toward Bait Al-Maqdis?' So Allah Most High revealed: Allah would not allow your faith to be wasted. (2:)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Chapters on Tafsir

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।