सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2947

नंबर 2947किताब 46, नंबर 21
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي النَّضْرِ الْبَغْدَادِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْحَسَنِ، هُوَ ابْنُ شَقِيقٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُبَارَكِ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنْ سِمَاكِ بْنِ الْفَضْلِ، عَنْ وَهْبِ بْنِ مُنَبِّهٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لَهُ ‏ "‏ اقْرَإِ الْقُرْآنَ فِي أَرْبَعِينَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَ قَدْ رَوَى بَعْضُهُمْ عَنْ مَعْمَرٍ عَنْ سِمَاكِ بْنِ الْفَضْلِ عَنْ وَهْبِ بْنِ مُنَبِّهٍ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَمْرٍو أَنْ يَقْرَأَ الْقُرْآنَ فِي أَرْبَعِينَ ‏.‏
Narrated 'Abdullah bin 'Amr:that the Prophet (ﷺ) said: "Recite the Qur'an in forty (days)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · Chapters on Recitation

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।