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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2934

नंबर 2934किताब 46, नंबर 8
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى، قَالَ حَدَّثَنَا مُعَلَّى بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ دِينَارٍ، عَنْ سَعْدِ بْنِ أَوْسٍ، عَنْ مِصْدَعٍ أَبِي يَحْيَى، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنْ أُبَىِّ بْنِ كَعْبٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَرَأَ ‏(‏فِي عَيْنٍ حَمِئَةٍ ‏)‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ وَالصَّحِيحُ مَا رُوِيَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قِرَاءَتُهُ ‏.‏ وَيُرْوَى أَنَّ ابْنَ عَبَّاسٍ وَعَمْرَو بْنَ الْعَاصِي اخْتَلَفَا فِي قِرَاءَةِ هَذِهِ الآيَةِ وَارْتَفَعَا إِلَى كَعْبِ الأَحْبَارِ فِي ذَلِكَ فَلَوْ كَانَتْ عِنْدَهُ رِوَايَةٌ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم لاَسْتَغْنَى بِرِوَايَتِهِ وَلَمْ يَحْتَجْ إِلَى كَعْبٍ ‏.‏
Narrated Ibn 'Abbas:from Ubay bin Ka'b that the Prophet (ﷺ) recited: "Fi 'Ainin Hami'ah" (18:)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih MatnAhmad Muhammad Shakir
  • Sahih MatnAl-Albani
  • SahihBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · Chapters on Recitation

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।