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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2912

नंबर 2912किताब 45, नंबर 38
حَدَّثَنَا بِذَلِكَ إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، عَنْ مُعَاوِيَةَ، عَنِ الْعَلاَءِ بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَرْطَاةَ، عَنْ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّكُمْ لَنْ تَرْجِعُوا إِلَى اللَّهِ بِأَفْضَلَ مِمَّا خَرَجَ مِنْهُ ‏"‏ ‏.‏ يَعْنِي الْقُرْآنَ ‏.‏
Narrated Jubair bin Nufair:that the Prophet (ﷺ) said: "You shall not return to Allah with what is more virtuous than what came from Him." Meaning the Qur'an
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · Chapters on The Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।