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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2903

नंबर 2903किताब 45, नंबर 29
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي حَبِيبٍ، عَنْ عُلَىِّ بْنِ رَبَاحٍ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ، قَالَ أَمَرَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ أَقْرَأَ بِالْمُعَوِّذَتَيْنِ فِي دُبُرِ كُلِّ صَلاَةٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated 'Uqbah bin 'Amir:"The Messenger of Allah (ﷺ) ordered me to recite Al-Mu'awwidhatain at the end of every Salat
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · Chapters on The Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।