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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2891

नंबर 2891किताब 45, नंबर 17
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ عَبَّاسٍ الْجُشَمِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ سُورَةً مِنَ الْقُرْآنِ ثَلاَثُونَ آيَةً شَفَعَتْ لِرَجُلٍ حَتَّى غُفِرَ لَهُ وَهِيَ سُورَةُ تَبَارَكَ الَّذِي بِيَدِهِ الْمُلْكُ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏
Narrated Abu Hurairah:that the Prophet (ﷺ) said: "Indeed there is a Surah in the Qur'an of thirty Ayat, which intercedes for a man until he is forgiven. It is [Surah] Tabarak Alladhi Biyadihil-Mulk
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · Chapters on The Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।