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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2884

नंबर 2884किताब 45, नंबर 10
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، قَالَ حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، فِي تَفْسِيرِ حَدِيثِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ قَالَ مَا خَلَقَ اللَّهُ مِنْ سَمَاءٍ وَلاَ أَرْضٍ أَعْظَمَ مِنْ آيَةِ الْكُرْسِيِّ ‏.‏ قَالَ سُفْيَانُ لأَنَّ آيَةَ الْكُرْسِيِّ هُوَ كَلاَمُ اللَّهِ وَكَلاَمُ اللَّهِ أَعْظَمُ مِنْ خَلْقِ اللَّهِ مِنَ السَّمَاءِ وَالأَرْضِ ‏.‏
Narrated 'Abdullah bin Mas'ud:"Allah has not created in the heavens nor in the earth what is more magnificent than Ayat Al-Kursi." Sufyan said: "Because Ayat Al-Kursi is the Speech of Allah, and Allah's Speech is greater than Allah's creation of the heavens and the earth
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · Chapters on The Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।