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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2869

नंबर 2869किताब 44, नंबर 12
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ‏ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ يَحْيَى الأَبَحُّ، عَنْ ثَابِتٍ الْبُنَانِيِّ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَثَلُ أُمَّتِي مَثَلُ الْمَطَرِ لاَ يُدْرَى أَوَّلُهُ خَيْرٌ أَمْ آخِرُهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ عَمَّارٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَابْنِ عُمَرَ وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏ وَرُوِيَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ مَهْدِيٍّ أَنَّهُ كَانَ يُثَبِّتُ حَمَّادَ بْنَ يَحْيَى الأَبَحَّ وَكَانَ يَقُولُ هُوَ مِنْ شُيُوخِنَا ‏.‏
Narrated Anas:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "The parable of my Ummah is that of a rain; it is not known if its beginning is better or its end
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · Chapters on Parables

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।