وَقَدْ رُوِيَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ أَحَبُّ الْعَمَلِ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مَا دِيمَ عَلَيْهِ . حَدَّثَنَا بِذَلِكَ هَارُونُ بْنُ إِسْحَاقَ الْهَمْدَانِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدَةُ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَهُ بِمَعْنَاهُ . هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ .
It has been reported from Hisham bin 'Urwah from his father, that 'Aishah said:"The most loved deed to the Messenger of Allah (ﷺ) was what he could do regularly." (Another chain) with similar meaning
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।