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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2850

नंबर 2850किताब 43, नंबर 125
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، أَخْبَرَنَا شَرِيكٌ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ جَالَسْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَكْثَرَ مِنْ مِائَةِ مَرَّةٍ فَكَانَ أَصْحَابُهُ يَتَنَاشَدُونَ الشِّعْرَ وَيَتَذَاكَرُونَ أَشْيَاءَ مِنْ أَمْرِ الْجَاهِلِيَّةِ وَهُوَ سَاكِتٌ فَرُبَّمَا تَبَسَّمَ مَعَهُمْ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَقَدْ رَوَاهُ زُهَيْرٌ عَنْ سِمَاكٍ أَيْضًا ‏.‏
Narrated Jabir bin Samurah:"I sat with the Prophet (ﷺ) more than one-hundred times. His Companions used to recite poetry and talk about things that occurred during Jahiliyyah, and he would remain silent, and sometimes he would smile along with them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।