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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2846.2

नंबर 2846.2किताब 43, नंबर 121
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مُوسَى، وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي الزِّنَادِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مِثْلَهُ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَالْبَرَاءِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ وَهُوَ حَدِيثُ ابْنِ أَبِي الزِّنَادِ ‏.‏
(Another chain) from 'Aishah with the same narration

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।