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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2833

नंबर 2833किताब 43, नंबर 107
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الأَسْوَدِ أَبُو عَمْرٍو الْوَرَّاقُ الْبَصْرِيُّ، حَدَّثَنَا مَعْمَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ الرَّقِّيُّ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ صَالِحٍ الْمَكِّيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُثْمَانَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَحَبُّ الأَسْمَاءِ إِلَى اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ عَبْدُ اللَّهِ وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Narrated Ibn 'Umar:that the Prophet (ﷺ) said: "The most loved names to Allah are 'Abdullah and 'Abdur-Rahman
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।