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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2827

नंबर 2827किताब 43, नंबर 101
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ، حَدَّثَنَا أَبُو جُحَيْفَةَ، قَالَ رَأَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَكَانَ الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ يُشْبِهُهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَهَكَذَا رَوَى غَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ نَحْوَ هَذَا ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ جَابِرٍ ‏.‏ وَأَبُو جُحَيْفَةَ اسْمُهُ وَهْبٌ السُّوَائِيُّ ‏.‏
Narrated Isma'il bin Abi Khalid:that Abu Juhaifah said: "I saw the Prophet (ﷺ), and Al-Hasan bin 'Ali resembles him the most
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।