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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2802

नंबर 2802किताब 43, नंबर 75
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَدَّادٍ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي عُذْرَةَ، وَكَانَ، قَدْ أَدْرَكَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم عَنْ عَائِشَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم نَهَى الرِّجَالَ وَالنِّسَاءَ عَنِ الْحَمَّامَاتِ ثُمَّ رَخَّصَ لِلرِّجَالِ فِي الْمَيَازِرِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ وَإِسْنَادُهُ لَيْسَ بِذَاكَ الْقَائِمِ ‏.‏
Narrated Abu 'Udhrah [and he lived during the time of the Prophet (ﷺ)]:from 'Aishah, that the Prophet (ﷺ) prohibitied the men and women from the Hammamat (plural of Hammam), then he permitted it for the men in Izar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।