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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2741.3

नंबर 2741.3किताब 43, नंबर 8
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى الثَّقَفِيُّ الْمَرْوَزِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ، عَنِ ابْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ أَخِيهِ، عِيسَى عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ عَلِيٍّ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَهُ ‏.‏
(Another chain) from 'Ali from the Prophet (ﷺ) with similar meaning

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।